ketki ka phool kaisa hota hai? Jane Ketki ke phool ko shrap ki kahani के बारे में आज हम आपको सब जानकारी देंगे। दोस्तों फूल सब को प्यारे होते है और संसार में लाखों त्रह के फूल होते है, और उन सब फूल को हम भगवान की पूजा करने, अपने घर और ऑफिस के स्जावट करने, खाने में, ख़ुशबू के लिए और भी बहुत से चेजो के लिए उसे करते है। लेकिन क्या आप जानते है की केतकी का फूल कैसा होता है? केतकी के फूल का पौदा कैसा होता है? केतकी के फूल को क्या श्राप मिला हुआ है?

हम आज आपको आपके इन सब स्वालो का जवाब देंगे , अगर आप जाना चाहते है कि केतकी का फूल कैसा होता है तो आप इस आर्टिकल को पूरा पढ़े, इसमें आपको केतकी के फूल के सब जवाब मिल जाएँगे।
Ketki ka phool kaisa dikhta hai (केतकी का फूल कैसा दिखता है )
दोस्तों आप ने अपने आस पास बहुत त्रह के फूल देखें होंगे, और सब फूलो कि ख़ुशबू और रंग अलग अलग होते है, जैसे हमने पहले बताया की फूलो को हम अलग अलग कम में उपयोग लाते है, ऐसे ही एक फूल की हम आज बात करे गे, उस फूल का नाम है केतकी का फूल। केतकी का फूल देखने में कैसा होता है यह शायद बहुत से लोगो को नहीं पता होगा।
केतकी का फूल दो रंग का होता है , एक होता है सफ़ेद रंग का केतकी का फूल, और दूसरा केतकी का फूल पीले रंग का होता है। सफ़ेद रंग वाले फूल को केवड़ा कहा जाता है, और जो पील रंग वाला फूल होता है उसको केतकी का फूल कहा जाता है। केतकी का फूल कुछ ख़ास जगहों पर ही मिलता है। यह फूल एक बहुत लंबे से पेड़ पर लगता है और और फूलो से अलग दिखाई पड़ता है, केतकी का फूल बहुत ही नुकीला होता है और लंबा होता है। केतकी के फूल के पत्ते बहुल मुलायम होते है। इसमें फूल के साथ काँटे भी लगे होते है जो बहुत बार फूल को तोड़ते टाइम चुभ जाते है।

दोस्तों आप में से बहुत से लोगो ने केतकी के फूल का फोटो भी नेही देखा होगा। अगर आप ketki ka phool kaisa hota hai यह देखना चाहते है तो हम आप को इसी आर्टिकल में केतकी के फूल का फोटो भी दिखा देंगे।
ketki ka ped dekhne mei kaisa hota hai ? केतकी के फूल का पेड़ देखने में कैसा होता है ?
आज हम केतकी का फूल कैसा होता है इस पर बात कर रहे है लेकिन हम केतकी के फूल की फोटो के साथ साथ आप लोगो को केतकी के फूल का पेड़ कैसा होता है यह भी बतायेगे।
केतकी के फूल का पेड़ बहुत ही लंबा होता है। यह पेड़ एक झाड़ी की त्रह होता है। केतकी के पेड़ की जड़ें बहुत जायदा गहरी और मज़बूत होती है। जैसा कि हमने पहले ही आप को बताया की केतकी के फूल के पेड़ के पत्ते बहुत ही हरे भरे पर काँटे वाले होते है। केतकी के पेड़ की खुस्बू बहुत दूर तक फैल जाती है और आप इसको इसकी खुस्बू से बड़ी आसानी से पहचान सकते है।
देखने में केतकी के फूल का पेड़ बिल्कुल खजूर के पेड़ की त्रह दिखता है और यह लंबा भी होता है। केतकी के फूल के पेड़ की आम लंबाई १० मीटर से १४ मीटर तक की होती है। और इसकी नुकीली पत्तिया १५ से ३० सेंटीमीटर तक फैली होती है।
भगवान शिव पर केतकी के फूल नहीं चढ़ते
दोस्तों हम लोग हमेशा ही अपने अपने भगवान को खुश करने के लिए उन पर त्रह त्रह के ख़ुशबू वाले फूल अर्पित करते है। हर भगवान को फूल बहुत ही प्यारे होते है। ऐसा भी माना जाता है कि जो आदमी रोज़ भगवान को फूलो की आराधना करता है उस पर भगवान बहुत जल्दी प्रसन होते है। भगवान शिव तो अपने भगतों से बहुत जायदा और बहुत जल्दी खुश हो जाते है।
भगवान शिव को फूल बहुत पसंद है इसीलिए उन पर अलग अलग त्रह के फूल चढ़ाये जाते है, ख़ासकर भगवान शिव को सफ़ेद रंग के फूल बहुत पसंद है, पर एक ऐसा फूल भी ही है जो भगवान शिव पर नहीं चड़ाईआ जाता है, और वह फूल कोई और फूल नहीं बल्कि केतकी का फूल है। आप सब भी हैरान होंगे की केतकी का फूल भगवान शिव पर क्यों नी चड़ाईआ जाता है जबकि केतकी का फूल बहुत ही जायदा सुंदर और ख़ुशबू वाला होता है।
इसके पीछे भी एक देवी कहानी है, केतकी के फूल को भगवान शिव का श्राप है की वह शिव पर कभी भी नहीं चड़ाईआ जाएगा। हम आप को यह कथा भी पूर बतायेगे जिस के कारण केतकी के फूल को भगवान शिव का श्राप मिला था।
कहते है कि एक बार भगवान ब्रह्म और भगवान विष्णु में इस बात को लेकर बहस हो गेई कि उन दोनों में सरबश्रेष्ट कौन है, जब वह दोनों किसी नतीजे पर नहीं पहुँचे तो इसका फ़ैसल करने के लिये वह दोनों भगवान शिव के पास आ गेय। तब भगवान शिव ने उन दोनों की बहस का फ़ैसला करने का निश्चे किया।
भगवान शिव ने ब्रह्म और विष्णु जी के झगड़े का फ़ैसला करने के लिए एक शिवलिंग की रचना की और फिर दोनों को जानी की विष्णु जी और ब्रह्म जी को उस शिवलिंग का किनारा जा शुरुआत ढूँढने के लिए कहा। दोनों की शिव जी की आगिया ले कर शिवलिंग का किनारा ढूँढने के लिए निकल पड़े।
भगवान विष्णु जी शिवलिंग के अपर की तरफ़ जब की भगवान ब्रह्म जी शिवलिंग के नीचे की तरफ़ चल पड़े। बहुत दिन हो जाने के बाद भी दोनों की उस शिवलिंग का किनारा ना मिला और दोनों निराश हो गेय। तब ब्रह्म जी को रास्ते में देवी केतकी जी का फूल मिला और उन्होंने ने केतकी के फूल को यह बोलने को मना लिया की वह शिव जी को जा कर कहे कि ब्रह्म जी को शिवलिंग का किनारा मिल गिया है। केतकी जी झूठ बोलने के लिए राज़ी हो गेई।
जब विष्णु जी और ब्रह्म जी दोनों वापिस शिव जी के पास आये तो पहले शिव जी ने विष्णु जी से पूछा की आप को किनारा मिला तो विष्णु जी ने कहा की उनको तो कोई भी किनारा नहीं मिला। फिर जब शिव जी ने ब्रह्मा जी से पूछा तो उन्होंने कहा कि उनको किनारा मिला गिया है और इस बात कि ग्वाह देवी केतकी है, जब शिव जी ने केतकी से पूछा तो उन्होंने ब्रह्म जी की हा में हा मिला के झूठ बोल दिया।
यह झूठ सुन कर भगवान शिव को बहुत ग़ुस्सा आये और उन्होंने ग़ुस्से में ब्रह्म जी का एक सिर काट दिया। और उन्होंने देवी केतकी को श्राप दिया कि अब तुम कभी भी मेरी पूजा नी कर सकोगे। जब दोनों ने भगवान शिव से हाथ जोड़ कर माफ़ी माँगी तो शिव ने उन दोनों को माफ़ कर दिया पर श्राप वापिस नी लिया। इसी वजह से केतकी के फूल से भगवान शिव की पूजा नी होती।
माता सीता से भी श्राप मिल चुका है केतकी के फूल को
भगवान शिव से श्राप की बात हम आप को बता चुके है , पर केतकी के फूल से माता सीता जी की भी आरती नहीं की जाती। इसके पीछे भी एक कहानी है जो हम आपको आज बतायेंगे।
कहा जाता है कि एक बार भगवान श्री राम जी अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता जी के साथ जंगल में अपने पिता दशरथ जी का पिंड दान करने वाले थे, वह सब इसकी त्यारिया कर रहे थे। भगवान राम जी और लक्ष्मण जी पिंड दान की सामग्री लाने के लिए कुटिया से बाहर गेय हुए थे, पर कहते है कि पिंड दान लेने के लिए राजा दशरथ समय से पहले ही आ गेय।
उस वक़्त श्री राम जी और लक्ष्मण जी कुटिया में नहीं तो सिर्फ़ माता सीता ही थे, माता सीता जी ने राजा दशरथ जी से कुछ देर रुकने को कहा पर राजा दशरथ ने कहा कि उनको स्वर्ग जल्दी वापिस जाना है तो आप ही मेरा पिंड दान कर दो। तब माता सीता जी ने एक गाये, फलूँगी नदी , एक कावँ और केतकी के फूल को साक्षी मान कर दशरथ जी का पिंड दान कर दिया और दशरथ जी प्रसन्न हो के स्वर्ग लोक में चले गेय।
कुछ समय बाद जब भगवान राम जी और लक्ष्मण जी वापिस आए तो माता सीता जी ने उनको सब बात बताई। तब भगवान राम जी ने इसके साक्षी के बारे में पूछा, तब सिर्फ़ गाये को छोड़ कर सब मुकर गये। तब माता सीता ने क्रोध में आ कर नदी, कावँ और केतकी के फूल को श्राप दे दिया और तब से केतकी के फूल को माता सीता की पूजा के लिए नेही लिया जाता है।
केतकी के फूल का अंग्रेज़ी में नाम क्या है (ketki ke phool ko english mei kya kehte hai)
केकती के फूल को बहुत से अलग अलग नाम से जाना जाता है, वेसे केतकी शब्द संस्कृत भाषा का शब्द है ,
केतकी के फूल का विगायनिक नाम पैडनस है। केकती के फूल को और भी के नमों से जाना जाता है जो की नीचे दिये गिये है
- स्क्रू पाइन (screw-pine),
- अम्ब्रेला ट्री (umbrella tree)
- स्क्रू ट्री(screw tree)
- केवडा (Kewda) और
- फ्रेग्रेंट स्क्रूपाइन (fragrant screwpine
Ketki Ka Ped Kaha Paya Jata Hai? (केतकी का फूल कहां पाया जाता है?)
केतकी एक सुगंधित फूलों वाला एक छोटा डालियो वाला झाड़ी या पेड़ है, यह पेड़ दक्षिणी भारत, बर्मा और अंडमान में जंगल विस्तार में पाया जाता है। यह पेड़ छोटा ,लम्बा और मजबूत जड़ों वाला होता है। इस पेड़ में लम्बे ,पतले ,नुकीले ,हरे भरे ,कांटेदार पत्ते होते है। केतकी का फूल ज्यादातर बारिश के मौसम में पाया जाता है। इसके फूल से सुगंधित खुशबु आती है जो आसपास के वातावरण को सुंगध से भर देती है।
Ketki Ke Phool Ka Upayog (केतकी के फूल के उपयोग)
केतकी का फूल बड़ा ही उपयोगी माना जाता है। इसका उपयोग कई जगह होता है। केवड़े का फूल दवाइओं ,अत्तर ,मिठाइओ में इस्तमाल किया जाता है।
हमारे देश में कई रसोई घरो में केवड़े के जल का उपयोग होता है।
केवड़े के फूल से अत्तर भी बनाया जाता है।
केवड़े के पत्तो से टोपी ,चटाइयाँ ,छाते भी बनाए जाते है।
केवड़े की नरम पत्तियों को कफनाशक माना जाता है और इसकी शाक यानि सब्जी भी बनाई जाती है।
कई लोग इसके तने से बोतल बंद करने वाला कॉक भी बनाते है।
इसका उपयोग त्वचा के लिए अच्छा माना जाता है। इसलिए इसका इस्तमाल सौंदर्यप्रसाधन में भी किया जाता है।
उम्मीद है कि आपको केतकी के फूल के बारे में बहुत सी जानकारी मिल गेई होगी, ऐसी और जानकारी के लिये हमारी वेबसाइट www.vlognews.in को बुकमार्क कर ले